कानपुर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर आरोप: क्या विवेचक ने आरोपी से मिलकर बदलवा दिए नाबालिग के बयान?
कानपुर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक पिता ने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित पिता का आरोप है कि उसकी नाबालिग बेटी के अपहरण मामले में जांच अधिकारी (विवेचक) ने आरोपी के साथ मिलीभगत की और डरा-धमकाकर नाबालिग के गलत बयान दर्ज कराए।
मामला: धारा 87/137(2) BNS के तहत थाना अरौल में दर्ज मुकदमा (017/2026)।
पिता का कहना है कि पुलिस ने दिल्ली से आरोपी विपिन साहू को गिरफ्तार किया, लेकिन थाने में पीड़िता के साथ मारपीट की गई।
आरोप है कि विवेचक ने अपनी मर्जी से बयान तैयार किए और नाबालिग को वही बोलने के लिए मजबूर किया। हद तो तब हो गई जब बिना मेडिकल कराए ही पीड़िता को कोर्ट में पेश कर दिया गया।
पीड़िता का खुलासा: नारी निकेतन से छूटने के बाद बेटी ने पिता को आपबीती सुनाई कि कैसे पुलिस के दबाव में उसने झूठे बयान दिए।
पीड़ित पिता संतोष उर्फ पप्पू ने कमिश्नर से मांग की है कि इस मामले की जांच किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए, पीड़िता का दोबारा मेडिकल और बयान कराया जाए और दोषी विवेचक के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
कानपुर के थाना अरौल क्षेत्र का एक मामला चर्चा में है। पीड़ित पिता ने आरोप लगाया है कि उनकी नाबालिग बेटी के अपहरण केस में पुलिस ने निष्पक्ष जांच नहीं की।
पुलिस पर दबाव का आरोप: पिता का दावा है कि थाने में विवेचक ने नाबालिग बेटी को मारा-पीटा और आरोपी को लाभ पहुंचाने के लिए दबाव डालकर अपनी मर्जी के बयान दर्ज कराए।
बिना मेडिकल कोर्ट में पेशी: पत्र के अनुसार, पीड़िता को अस्पताल ले जाया गया लेकिन बिना मेडिकल कराए ही कोर्ट में पेश कर दिया गया।
न्याय की मांग: पीड़िता के पिता ने लिखित शिकायत में कहा है कि विवेचक ने आरोपी विपिन साहू से साठगांठ कर जांच को प्रभावित किया है।
अब देखना यह है कि पुलिस कमिश्नर इस गंभीर शिकायत पर क्या कड़ा कदम उठाते हैं।
